मेरे पास कोई बिजनेस प्लान नहीं था ना मेरे पास कोई बिजनेस एक्सपीरियंस था
में बहुत मेहनती था यहां पर मेरे दोस्त लोग कॉलेज में बहुत मजे करते थे मेरे को वहां कॉलेज में बहुत मेहनत करनी पड़ी ना घर था ना पैसे थे उसने पर किसी तरीके से संघर्ष करते-करते मैंने जिंदगी में बहुत ज्यादा संघर्ष करना सीख 18-20 घंटे काम करना सीख कॉलेज की पढ़ाई रिसेप्शनिस्ट की जॉब और घर चलना और और बड़े सपने देखना तो जैसे मतलब अगर आप मैंने देखा कि मैं एड्रेस एसएमएस काम करता था
पीछे वहां पर कंप्यूटर लैब था जिसमें सॉफ्टवेयर की कोडिंग होती थी हमारे यूनिवर्सिटी का पूरा आईटी बनता था तो वहां पर एक इंटरेस्ट था वह जो बनाते थे मुझे काफी कूल लगता था तो मैं जाकर बोला उसको कि मेरे को भी सीखना है तो उसने मुझे इतनी बड़ी बुक दे दी विजुअल बेसिक प्लस की पढ़ने के लिए तो मैं पढ़ाई करता था जॉब करता था और रात में वह बुक पढ़ना था धीरे-धीरे मेरा इंटरेस्ट आया तो मैं नहीं चीज कोड करके उनको दी फिर उन्होंने मुझे रिसेप्शन जॉब से अंदर कोडिंग की जॉब दे दी तो वह जब एक पार्ट टाइम जॉब की जगह पूरे समर में मेरे लिए फुल टाइम जॉब बनी मैं कॉलेज में जो पढ़ रहा था वह काफी थियोरेटिकल था और जो मैं यहां पर जॉब में कर रहा था वह काफी प्रैक्टिकल था और उससे मुझे कंज्यूमर्स का जो कनेक्ट मिला वह एक अलग लेवल का मिला मैं कॉलेज में कंप्यूटर साइंस में और तुम मैंने अप्लाई किया माइक्रोसॉफ्ट में इंटर्नशिप के लिए क्यों अप्लाई कर रहे हो हमारे कॉलेज में नहीं आते हो मेरे को वहां से कॉल आया मैं चला गया पर मेरा इंटरव्यू में सिलेक्शन नहीं हुआ काफी डिसएप्वाइंटमेंट हुआ अगले साल मैंने फिर बहुत जम के तैयारी करी और इस बार मेरे को वहां से ऑफर आया जब मैं माइक्रोसॉफ्ट गया इंटर्नशिप करने 3 महीने तो मेरे लिए वह एक नई दुनिया थी इतने इंटेलिजेंट लोग काम कर रहे थे
जब अपॉर्चुनिटी मिली बिल गेट्स के घर जाने की
मेरे खुशी तो कोई दिखाना नहीं था तो मैंने देखा कि वह एक ऐसी कंपनी है जहां पर जिसका प्रोडक्ट हम लोग सब उसे करते हैं माइक्रोसॉफ्ट वर्ड माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल यह उसे कर करके मैं बड़ा हुआ हूं बहुत छोटी उम्र में मेरे फादर ने मेरे को एक कंप्यूटर दिया था जिसमें मैं यह सॉफ्टवेयर उसे करता था तो मेरे अंदर एक अलग सा जुनून आया कि मुझे इस कंपनी के लिए काम करना है कॉलेज खत्म हुआ मैं कनाडा में था तो मैं उस चला गया सेट जहां पर मैंने माइक्रोसॉफ्ट के अंदर अगर कोई चाहे दुनिया बदलने तो बदल सकता है जो मुझे मजा आता था लोगों से मिलकर क्योंकि जिन प्रोडक्ट्स पर मैं काम करता था वह लोग उसे करते थे जो मैं जून में इंप्रूव करता था वह लोग उसे करते थे और बहुत खुश होते थे जब मैं प्रॉब्लम को हम प्रॉब्लम की तरह देखें ऐसा बिजनेस की तरह ना देखें माइक्रोसॉफ्ट में हमारा बहुत फॉक्स होता था कस्टमर पर हम लगभग आधा वक्त कस्टमर के साथ बताते थे यह समझते थे कि उनका क्या प्रॉब्लम आ रही है और हम उसका एफर्ट लगाते थे कि हम उसे प्रॉब्लम को सॉल्व करें तो हम बिना कंस्ट्रेंट के काम करते थे हमारे पास ऐसा नहीं होता था कि यह बिजनेस बनेगा नहीं बनेगा इसमें पैसा कितना लगेगा हमारा कस्टमर को जो है और खुश करना है उसकी प्रॉब्लम सॉल्व करनी है सिमिलरली मैं माइक्रो देखकर मैं अच्छी जॉब छोड़कर आए वापस मैं काफी जल्दी इंसान हूं आया मैंने तीन-चार महीने खाली अपने कारगर आज को ऑफिस बनाने में लगा दिया तो काफी चिंतित भी थे मेरे मां-बाप की करके आ रहा है उसके बाद उसके लिए हाउसिंग की प्रॉब्लम सॉल्व करने के लिए मैं काम किया मेरे पास कोई बिजनेस प्लान नहीं था ना मेरे पास कोई बिजनेस एक्सपीरियंस था मैं काफी ही पढ़ाकू लड़का था स्कूल में कॉलेज में बट मेरे पास माइक्रोसॉफ्ट का थोड़ा सा एक्सपीरियंस था कि अगर मैं खाली कस्टमर पर फोकस करूं और उनकी उनकी दुनिया बदलो तो बिजनेस बन सकता है तो ऐसे ही टाइम करता गया उसे दौरान कुछ अच्छे लोग मिले जिनके साथ मेरी थिंकिंग मैच होती थी मुझे मिला मेरा को फाउंडर अमित चौधरी जिसने मुझे ज्वाइन किया और क्योंकि उसके पास कोई घर नहीं था वह मेरे घर में रहना शुरू किया उसने दिल्ली में वह आया था कोलकाता से तो उसे जब वह आया तो मेरे अंदर एक और स्टूडेंट हाउसिंग प्रॉब्लम तो सॉल्व कर दिए तो कहीं तब पड़ा कि हिंदुस्तान इंडिया को कहते हैं वर्ल्ड कप ब्लाइंड कैपिटल 40% भारत के चार वर्ल्ड के 40% लाइन पीपल इंडिया में रहते हैं और इंडिया में करीबन आदि इंडिया को चश्मा चाहिए पर खाली 25% लोग और मेरा एक और को फाउंडर मेरे को तब हमने लिंकडइन पर ढूंढा सुमित जिसकी उम्र हमसे थोड़ी बड़ी थी पर उसने भी अभी-अभी अपनी जॉब छोड़ी थी एक इवार कंपनी से और ऐसी शुरुआत की जर्नी 2011 में और जब हम इस जर्नी पर चल रहे थे तो कुछ इन्वेस्टर ने भी हमें अप्रोच किया हमने ज्यादा नेगोशिएट नहीं किया कुछ नहीं किया बस उनको उनके साथ जुड़ा और वक्त कटता गया और तब से आज 10 साल हो गए हम खाली इस मिशन में लगे हुए हैं बस क्या यह प्रॉब्लम है क्या यह जेनुइनली रियल प्रॉब्लम है हमें लग रहा है कि यह प्रॉब्लम है और बाकी लोगों को नहीं लग रहा है और यह कितनी बड़ी प्रॉब्लम है और उसे प्रॉब्लम का सॉल्यूशन बनाने में ऐसा सॉल्यूशन जो प्रॉब्लम को थोड़ा बहुत नहीं बट बड़े तरीके जिसको मैं कहता हूं मेक मीनिंग रेस्ट एवरीथिंग विल फॉलो दूसरी मेरी एक लर्निंग रही है कि जो ऑब्सेशन होता है ना वह हमको कस्टमर की तरफ रखते हैं हम तो कंपनी का जो सक्सेस भारी धीरे आए पर लॉन्ग टर्म और सस्टेनेबल आती है हमने देखा क्योंकि हम इतने धीरे-धीरे 56000 लोगों में भी वह सेशन आ गया इसमें जरूर 10 साल वालों पर लोग आपके जो लोग हैं वह वही करेंगे जो आप करेंगे तो अगर आपके लिए कोई चीज इंपोर्टेंट है तो आप ही मन कर चलिए वह बाकी लोगों के लिए इंपॉर्टेंट होगी तो लर्निंग इसके अंदर यह है कि आपको जिस टाइप की कंपनी बनानी है आपको वैसा बनना पड़ेगा खुद और वैसे ही कंपनी आपकी बनेगी इसके अलावा आपको को-फाउंडर चाहिए आपको ऐसे लोग चाहिए और सबसे बड़ा काम है काउंटरपारनेर का है ऐसे लोगों को अपने साथ जोड़ना और ऐसे लोगों को खुश रखना है ऐसे लोगों के साथ अपना सुख दुख बांटना उनके साथ कंपनी का जो शेयर होल्डिंग कहते हैं वह बांटना और साथ में आगे बढ़ाना चौथ में यह वैल्यूएशन और इन्वेस्टमेंट के बीच ऐसा करने के लिए जो 10 टाइम्स बेटर है अगर वह कुछ ऐसा करेंगे तो इन्वेस्टर उनके पीछे अपने आप आएंगे और यह ना हमारा काम एंटरप्रेन्योर्स वैल्यू क्रिएट करना है प्रॉब्लम सॉल्व करना है वैल्यूएशन बनाना हमारा काम नहीं है वह इन्वेस्ट उसका काम है तो हमको यह समझ लेना चाहिए कि हमारा एंटरप्रेन्योरशिप इकोसिस्टम को बहुत आगे लेकर जाएगा
लेंसकार्ट एक भारतीय बहुराष्ट्रीय ऑप्टिकल प्रिस्क्रिप्शन आईवियर खुदरा श्रृंखला है,
जो दिल्ली एनसीआर में स्थित है। 6th मार्च 2023 तक, लेंसकार्ट के 2,000 से अधिक खुदरा स्टोर था, जिनमें से तीन-चौथाई भारत में हैं। नई दिल्ली में इसकी विनिर्माण सुविधा प्रति माह 3 लाख ग्लास बनाती है।
लेंसकार्ट राजस्थान के भिवाड़ी में एक स्वचालित फैक्ट्री का निर्माण कर रहा है, जिसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 5 करोड़ चश्मे की है। 14 साल पहले संस्थापकपीयूष बंसलअमित चौधरी औऱ सुमीत कपाहीमुख्यालयगुरुग्राम, हरियाणा, भारतस्थानों की संख्या2,000 खुदरा स्टोर (2022)सेवारत क्षेत्रभारतदक्षिणपूर्व एशियापूर्व एशिया
मध्य पूर्व संयुक्त राज्य अमेरिका प्रमुख फ़ैल गया
आज पुरे विश्व मे lenskart जाना जाता है
लोगपीयूष बंसल (अध्यक्ष; एमडी)


